History of Computer (कंप्यूटर का इतिहास )in
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आज का युग विज्ञान का युग है | कम्प्यूटर इंसान की जरुरत बन चूका है इस लिहाज से आज के युग को अगर हम कंप्यूटर का युग कहे तो इसमें कोई हैरानी नहीं होगी | Education से लेकर Entertainment और यातायात से लेकर स्वास्थ तक लगभग हर एक क्षेत्र में कंप्यूटर ने अपनी उपयोगिता को सिद्ध किया है | बावजूद इसके इससे जुड़े कई सारे पहलु भी है जिनसे हम बेखबर है चलिए जाने की आखिर कोन से ऐसे पहलु है ? हम आपको इस लेख के माध्यम से बताएंगे कंप्यूटर का इतिहास व विकाश कैसे हुआ ?
(1) चार्ल्स बेबेज
यह बात है 18 वीं शताब्दी कोई है जब पूरी दुनिया तकनीक के नाम से बिलकुल अनजान
थी उस समय इंसान जो कुछ भी अपनी आँखों से देखता था बस उसी से विश्वास करता था |
उस समय दुनिया के लोगो का तकनीक से दूर - दूर तक कोई संबंध नहीं था | इसी बीच लंदन
में पैदा हुए " चार्ल्स बैबेज ने लोगो की सोच को ही बदल दिया " चार्ल्स बेबेज को पचपन से ही
गणित के विषय में रूचि थी | उन्होंने अपनी इस रूचि और बुद्धी के बल पर कंप्यूटर का आविष्कार
किया | " चार्ल्स ने 14 जून 1882 में कंप्यूटर बनाने का दावा किया था | हालाँकि बहोत से इतिहासकार
इस बात से इंकार करते है कि "चार्ल्स बेबेज ने ही कंप्यूटर का आविष्कार किया था | माना जाता है कि "चार्ल्स बेबेज कंप्यूटर मशीन बनाने में तो कामयाब रहे लेकिन उस मशीन को पूरी तरह से नहीं बना पाए |
शुरुआत में उन्होंने एक बेहद बड़े आकर की मशीन का आविष्कार किया चूँकि चार्ल्स गणित के छात्र थे तो उनका इस मशीन को बनाने का मकसद NUMBRS की गणना करना था | जिसके तहत उन्होंने
इस मशीन का आविष्कार किया उस समय " चार्ल्स " ने मशीन को डिफरेंट ईंजन का नाम दिया था |
हालाँकि यह मशीन सिर्फ गणना कर सकती थी यह नहीं बता सकती की थी की गणना ठीक भी है या नहीं जो सिर्फ एक कंप्यूटर बता सकता है | इसीलिए कई विशेषज्ञ का कंप्यूटर के आविष्कार को लेकर अलग - अलग विचार है | खैर चार्ल्स अपने इस आविष्कार से कंप्यूटर तकनीक की नीव तो रख ही चुके थे |
(2) कोनराड जूस ने बड़ाई कहानी :-
18 वीं शताब्दी के दौरान " चार्ल्स बेबेज " के कंप्यूटर के आविष्कार के बाद लोगो में तकनीक को जोड़ने और उसको समझने की दिलचस्पी जगी | समय के साथ कई चीजों में बदलाव आ रहा था लेकिन फिर भी दुनिया के लोगो को अभी कंप्यूटर जैसी कोई मशीन बनने का कोई अनुमान नहीं था |
हालाँकि विभिन्न विशेषज्ञ नई - नई मशीनो को खोजने में लगे थे | तकनीक के युग में दूसरा सबसे बड़ा दिन तब आया जब जर्मनी के वैज्ञानिक " कोनराड जूस " ने programing computer का आविष्कार कर दिया |
यह 1936 और 1938 के बीच का दौर था | " कोनराड " का आविष्कार इसलिए भी काफी अहम क्योकि उन्होंने पहले programing computer का आविष्कार किया था | "चार्ल्स बेबेज" की मशीन काफी हद तक इंसानी दिमाग पर निर्भर करती थी | लेकिन कोनराड का computer खुद programing
से चलता था , कोनराड ने इस कंप्यूटर का नाम Z1 दिया |
(3) DIGITAL COMPUTER
कोनराड जूस के आविष्कार के बाद यूरोपियन देशो में नई क्रांति का संचार हो गया था | समय के साथ साथ computer की मांग बढ़ती जा रही थी | Computer के आविष्कार ने बहुत से लोगो को प्रभावित किया | यह हजारो लोगो के काम को खुद अकेला ही कर सकता है | जिन कामो को करने में बहुत ज्यादा समय लगा करता था वो काम को कंप्यूटर अब चुटकियो में तथा कम समय में ही कर देता है |
कम्पुयटर की मदद से हम लाखो , करोड़ो रुपयों का हिसाब बड़ी आसानी से व बड़ी जल्दी से कर सकते है |
इससे लोग COMPUTER की और ज्यादा आकर्षित होने लगे | हालाँकि उस समय लोगो ने यह सोच लिया था की कोनराड जूस ने जिस Programing computer कस आविष्कार किया है वंही दुनिया का आखरी आविष्कार है | सायद ही लोगो को अंदाजा था की कुछ आने वाले चंद सालो में उन्हें आविष्कार से बेहतर कोई और आविष्कार भी देखने को मिलेगा | खैर समय तेजी से बढ़ता गया पर तकनीक की दुनिया में दिन / प्रतिदिन नए - नए बदलाव आते गए | हर नया बदलाव इंसान को चौंका देने वाला था | और उसको सोचने पर मजबूर था की विज्ञान बहुत ही तेजी से दुनिया भर में छा रहा है |
(4) जे. प्रेस्पर एकर्ट ने दिया DIGITAL COMPUTER
कोनराड जूस के आविष्कार के कुछ सालो बाद लोग तकनीक की दुनिया में एक नए आविष्कार के गवाह बने | जब जे. प्रेस्पर एकर्ट ने दुनिया को पहला Electronic Computer दिया | यह कंप्यूटर पूरी तरह से Digital Computer था | सबसे बड़ी बात यह थी की इस कंप्यूटर के बाद ही हर इलेक्ट्रॉनिक
उपकरण डिजिटल रूप में आने लगा | सालो से उपयोग की जा रही सुई वाली घड़ी की जगह अब डिजिटल घड़ी ने ले ली है | ये सब चीजे जे. प्रेस्पर एकर्ट के digital computer की खोज के बाद ही वजूद में आयी है | एकर्ट ने Digital कम्पूटर की खोज सन 1946 में की थी | जे. प्रेस्पर एकर्ट ने डिजिटल कंप्यूटर की खोज अपने प्रोफेसर जॉन मोकलि के साथ मिलकर की थी | जॉन मोक्ली ही
एकर्ट को विज्ञानं पढ़ाया करते थे | इन दोनों ने मिलकर डिजिटल कंप्यूटर की खोज की तथा सरकार से डिजिटल कंप्यूटर बनाने का अनुबंध तय क्र लिया |
(5) ENIAC
इसके तहत इन दोनों ने एक साथ मिलकर डिजिटल कंप्यूटर बनाना शुरू किया | दोनों ने इसे ENIAC नाम दिया | इस तरह एकर्ट और मॉक्ली के बाद कंप्यूटर को एक नई पहचान मिली | आगे चलकर डिजिटल कंप्यूटर की उपयोगिता को देखते हुए USA ARMY ने संख्याओं की गणना के लिए इसका इस्तेमाल करना शुरू क्र दिया था |
(6) ECC
इसीसी बनी पहली कंप्यूटर कम्पनी | दुनिया के लोगो ने जिस मशीन के बारे में कभी नहीं सोचा था वो मशीन एकर्ट और मोक्ली ने अपनी कई सालो की मेहमत के बाद उस मशीन को बनाकर तैयार कर दिखाया | संयुक्त रूप से बनाया गया कंप्यूटर उनकी सबसे बड़ी ताकत बन चुकी थी | कंप्यूटर के आविष्कार के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी इसको बनाने में और उससे भी बड़ी मुश्किल थी की पूरा फार्मूला किसी कंपनी को दिया जाये और फिर उस फॉर्मूले से कई कंप्यूटर तैयार किये जाये | दोनों ने ऐसा करना उचित नहीं समझा | इसलिए दोनों ने सोच - विचार कर अपनी खुद की ही कंपनी खोलने का निर्णय लिया | दोनों ने डिजिटल कंप्यूटर बनाने की कम्पनी खोल ली | और उन्होंने खुद ही कंप्यूटर बनाना शुरू कर दिया | इस कंपनी को ECC नाम दिया गया|
ECC FULL FORM - ELECTRONIC CONTROL COMPANY
यह दुनिया की पहली COMPUTER COMPANY थी | हालाँकि दोनों ने बाद में अपनी कंपनी का नाम बदलकर अपने नाम पर रख लिया | कंपनी खोलने के बाद कंप्यूटर जगत में क्रांति आ गयी थी यह दौर था साल 1950 का जब दुनिया के लोग कंप्यूटर के नाम से परिचित हो रहे थे | समय के साथ साथ एकर्ट ने अपनी कंपनी को और विकसित करने के लिए और भी नए नए आविष्कार करते रहे | डिजिटल कंप्यूटर के बाद उन्होंने कंप्यूटर की दुनिया में 85 आविष्कार किये | जिनको उन्होंने अपने नाम से ही पेटेंट करवाया | विज्ञानं के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए 1968 में उन्हें नैशनल अवार्ड ऑफ साइंस के सम्मान से नवाजा गया | समय के साथ साथ कंप्यूटर की डिमांड भी बढ़ती जा रही है | कंप्यूटर हमारे जीवन का एक अभिन्य अंग बन चूका है |
आज के युग में सभी काम /कार्य कंप्यूटर के जरिये होने लगे है आज के समय में कंप्यूटर
की मांग बहुत बढ़ गई है | आज के समय में सभी कम्प्यूटर को जानना व सीखना ज्यादा
पसंद करते है क्युकी कंप्यूटर की मदद से हम कोई भी काम घर बेठ कर भी कर सकते है |
"आवश्यकता अविष्कार की जननी होती है " यह कहावत कंप्यूटर के अविष्कार पर सटीक बैठती है अब आप यह जानने को बहोत उत्सुक होंगे की (कंप्यूटर का इतिहास एवं विकाश
कैसे हुआ ) ? history of computer in Hindi
यह कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा की computer मानव जीवन का एक सबसे बड़ा आविष्कार
है | आज विश्व के हर एक स्थान पर computer का किसी न किसी तरह इस्तेमाल हो रहा है जैसे
फिल्म निर्माण ,यातायात ,व्यापार आदि में कंप्यूटर का उपयोग हो रहा है |
History of computer in Hindi - कम्प्यूटर का इतिहास हिंदी में
कम्प्यूटर का नाम सुनते ही अक्सर हमारे मन में यह सवाल आता है की कम्प्यूटर का आविष्कार किसने और क्या सोच कर किया होगा ? तो चलिए कम्प्यूटर के इतिहास (history of computer in hindi) को समझने की कोसिश करते है |
abacus : - ( अबेकस )
सर्वप्रथम अबेकस डिवाइस का अविष्कार गणना करने के लिए लगभग 600 ईसा. पूर्व चीन में हुआ था | अबेकस को सारोबान के नाम से भी जनता जाता है | इस डिवाइस की मदद से बिना कॉपी, पेन या कैलकुलेटर के गणितीय किर्याओ को सरलता से हल किया जा सकता है |
अबेकस आयताकार फ्रेम में बना तारो का एक ढांचा है, तथा उन तारो में
गोल मोती पिरोये हुए होते है , इन्ही मोतियों की मदद से अंको को जोड़ने ,घटाने , गुना व भाग करने जैसी गणनाएँ की जाती है | इन मोतियों को beads भी कहा जाता है जिन्हे गणना करने के लिए तारो पर सरकाया जाता
है |
john Napier's Bone ( जॉन नेपियर की हड्डी )
इस यंत्र का आविष्कार 17 वी शताब्दी के प्रारम्भ में किया गया था |
नेपियर ने बॉन्स हड्डियो , हाथी के दांत या धातु से बनी छडे होती है
जिनके ऊपर नम्बर लिखे हुए होते है | इस यंत्र को या डिवाइस को
card board multiplication calculator भी कहते है |
यह एक मैकेनिकल गणना करने वाली यंत्र या डिवाइस है जिसका उपयोग
गुना व भाग करने के लिए किया जाता है | इसके विपरीत यह manual calculation डिवाइस है इसका उपयोग लगभग 1890 ई. तक किया गया।
PASCAL
सन 1942 में फ्रांस के mathematician ब्लेज पास्कल ने एक यांत्रिक गणना करने का यंत्र बनाया था। जिसे adding machine के नाम से जाना जाता था ा
यह मशीन सिर्फ जोड़ने व घटाने की गणना का काम करती थी।
यह मशीन घड़ी और ऑटोमीटर के सिद्धांत पर काम /कार्य करती है।
पास्कल द्वारा बनाई गयी इस युक्ति को ( पास्कलाइन ) कहा गया है।
यह सबसे पहली 'mechanical calculating machine थी।
ANALYTICAL ENGINE को दुनिया के पहले विशेष प्रयोजन वाले मैकेनिकल कंप्यूटर के लिए जाना जाता है | और आधुनिक कंप्यूटर के लिए ब्लोटिंग सेट करता है | यह 1834 और 1846 के बीच प्रसिद्ध अंग्रेजी गणितज्ञ " चार्ल्स बेबेज " के द्वारा डिजाइन किया गया है | चार्ल्स बेबेज ANALYTICAL ENGINE बनाने के लिए पीतल के गियर का इस्तेमाल किया | यह इलेक्ट्रिक नहीं जो भाप इंजन द्वारा संचालित है |
Generation of computer ( कंप्यूटर की पीढ़ियाँ )
कंप्यूटर की पीढ़ियों को जानने से पहले ( computer Kya Hai ) के विषय में आपको अच्छे से जान लेना चाहिए। ताकि आप computer की Generation को और अच्छे से समझ सके |
computer की पीढ़ियों को सारांश रूप से निम्न प्रकार से समझा जा सकता है।
क्र
म. पीढ़ी काल तकनीक
- प्रथम पीढ़ी 1942 - 1955 वैक्यूम ट्यूब
2. द्वितीय पीढ़ी 1955 - 1964 ट्रांजिस्टर
3. तृतीय पीढ़ी 1964 -1975 IC इंटरग्रेटेड चिप
4 . चतुर्थ पीढ़ी 1975 -1990 VLSI
5. पंचम पीढ़ी 1990 ULSIC WITH AI
कम्प्यूटर को जानने के लिए आप हमारे इस लेख HISTORY OF COMPUTER इन हिंदी को जरूर पढ़े। इस लेख की मदद से आप कंप्यूटर की पीढ़ियों का पूरा इतिहास जान जायेंगे |
आज हमने क्या सीखा ?
वास्तव में कंप्यूटर के अविष्कार ने आज पूरी दुनिया को ही बदलकर रख दिया है | इस पोस्ट में आपको History of computer in Hindi व आविष्कारसम्बंधित लगभग साडी बातो को जान लिया है
जो हर किसी को जानना बहुत ही महत्वपूर्ण हो सकता है |
उम्मीद करता हु की आपको मेरा यह लेख ( HISTORY OF COMPUTER IN HINDI ) जरूर पसंद आया होगा | आज के इस लेख में आपको कुछ न कुछ सिखने को जरूर मिला होगा |
धन्यवाद
आशा करता हु की आप सभी को यह लेख पसंद आया होगा
👍🏻
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